आज फिर वो दिन गुज़र गया तेरी याद करते करते
आज फिर वो रात काट गई तुझे ढूंढ़ते ढूढ़ते
कैसे बताऊ तुमको कि तुम ही थी मेरी दुनिया
कैसे समझाऊ तुमको कि तुम ही थी मेरी आत्मा
वो कहानी लिखते मिटाते फिर से वो शाम आ गई
आज फिर वो दिन गुज़र गया तेरी याद करते करते
आज फिर वो रात काट गई तुझे ढूंढ़ते ढूढ़ते।।
अच्छा, याद है वो पहली कविता
जो तुम्हारे लिए ही लिखी थी मैंने?
हाँ, मैंने ही लिखी थी और दिल से लिखी थी
और, वो पाँच पन्नो वाली कहानी
जिसको पढ़कर तुमको मुझसे जलन हुई थी?
वो भी मैंने ही लिखी थी
तुमसे खुद का इज़हार करते हुए
अच्छा, छोड़ो याद है हमारी पहली इवनिंग वॉक
वो सड़क पर ढेर सारा ज़ाम
उस मेले में कोई खुश ना था
सिर्फ हम दोनों को छोड़कर
वो टूटी सड़के,
पीछे से जोर जोर से बजते हुए हॉर्न
कुछ भी परेशान नहीं कर रहा था
क्योंकि तुम जो साथ थी।
और आज,
आज तो तुम गुम हो गई हो
सड़क के एक कोने से दूसरे कोने को निहारता हूं मैं
शायद कहीं दिख ही जाओ तुम
हाँ पता है, हँस रही हो मेरे पे ना
कि बच्चा अब समझ आया मैं कौन हूँ
हाँ, आ गया समझ में
वो फेयरवेल की ज़िद
आज भी खुद से नफ़रत करवाती है
मैंने कैसे वो लंबी वॉक मिस कर दी
मैंने कैसे तुम्हारी आँखों में आंसू बहने दिए
अफ़सोस है मुझको
कि मैं तुमको समझ ना सका
और,
और आज बस दिन गिन रहा हूँ
कैलेंडर में तारीखें बदलते देख रहा हूँ
नहीं है मुझमे ताकत
कि दुनिया से लड़ जाऊँ
और भागकर तेरे पास आ जाऊँ
अपनी आंखें बंद करके
तेरी सांसों को महसूस करुँ
तेरे खूबसूरत बालों की यूं ही बिखेर दूँ
और तेरी प्यार भरी डॉट से
दुःखी सा दिखने लग जाऊँ
और फिर, तुम प्यार से मुझे मनाओ।।
हाँ, हाँ जानता हूँ कि
मैं नाराज होकर कहाँ जाऊंगा
पर तुम तो चली गई
क्यों?
किससे जवाब पूछू
ख़ैर, आऊंगा तुम्हारे पास
और जवाब लूँगा
तो जान नहीं छूटी मुझसे
जवाब तैयार रखना।
मैं जरूर आऊंगा, जल्दी ही।।
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