ओ रे पिया
[1]
सर-सैय्या पर
लेटा हूँ, आस-पास रुदन
है
पर मेरे उर
में शांति है |
अजीब है, मृत्यु
का साम्राज्य भी
कोई जाना नहीं
चाहता, पर
जाना तो सबको
पड़ता है |
मैं भी उसी
में था,
जो आ गया
इस संसार में, कई अपनों को
छोड़कर
अपना घर, अपने
दोस्त, अपने ख्वाब
और अपना प्रेम
हाँ, प्रेम भी
छोड़ आया हूँ मैं
उसे बोझ तले
नहीं मारना मुझे
मुझे यादों में
जीने का शौक नहीं है
मैं उसे बस
यूँ ही
दुनिया जीने के
छोड़ आया हूँ
आज उसके आंसू
दिख रहे है मुझे
जी कर रहा
है, जाके
अपने होठों से
उसे सुखा दूँ
पर नहीं, आंसू
नहीं आएगा तो यादें नहीं
जाएंगी |
मुझको पता है
कि
भीड़ के
इस रुदन में
भी वो मुझे सुन रही
है
तो पिया,
मैं तुम्हे बताना
चाहता हूँ कि
मैं तुमसे बेइंतेहा
मुहब्बत करता हूँ
तुम्हारी वो मुस्कुराहट,
आज भी मुझे याद है
तुम्हारा वो बनावटी
चेहरा
तुम्हारी वो गोल-मटोल आँखें
तुम्हारे वो खूबसूरत
बाल
आज भी मुझे
याद है
पिया, याद है
जब मैं तुम्हारे
फ़ोन पर यूं ही सन्देश
भेजा करता था
पता है, डर
लगता था मुझे
कि कही तुम
मुझे ब्लॉक ना
कर दो
और जान-बूझकर
तुम्हारी जूठी कोल्ड-ड्रिंक छीनकर
पी जाना
उस
वक़्त मुझे तुम्हारे
गुस्से का अंदाजा
था
पर ये भी
पता था कि इतने लोगों
के सामने तुम
कुछ कहोगी नहीं
|
अच्छा, माफ़ कर
देना
मेरी उन सारी
बेवकूफियों को
जिन्हे मैं जानकर
की थी |
वैसे, मैं चालाक
बड़ा हूँ
मुझे पता है
कि आज तो तुम मेरी
हर गलतियों को
माफ़ कर दोगी
|
पर ओ रे
पिया
तुम्हे भी पता
है कि मैं तुमसे
कितनी मुहब्बत करता हूँ
तो आज से
सलाम तुमको
ये दुनिया तुमको
मुबारक
खुश रहना, मौजू रहना और
बस हर साल
आज के दिन
मेरे नाम पे
एक कविता लिख लेना
और
एक बात और
पिया
कभी मुझे याद
करके रोना मत
क्योंकि
आज से ज्यादा
सुकून मुझे कभी
नहीं मिला
अच्छा चलो, जल्दी तो नहीं
पर
इंतज़ार है तुम्हारा
भी, इस दुनिया में
मैं खड़ा हूँ
लिए फूल का गुलदस्ता |
और ओ रे
पिया
एक कविता भी
सिर्फ तुम्हारे लिए
ओ रे
पिया |ओ रे पिया |
No comments:
Post a Comment